स्वदेश वापसी /दुबई से दिल्ली-'वन्दे भारत मिशन' Repatriation Flight from UAE to India

'वन्दे भारत मिशन' के तहत  स्वदेश  वापसी   Covid 19 के कारण असामान्य परिस्थितियाँ/दुबई से दिल्ली-Evacuation Flight Air India मई ,...

January 15, 2026

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026


जनवरी 10 से 18 तक ,भारत मंडपम (प्रगति मैदान ) दिल्ली में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 साहित्य प्रेमियों के लिए एक भव्य और प्रेरणादायक आयोजन है ।  जहाँ देश-विदेश के प्रतिष्ठित प्रकाशकों, लेखकों और पाठकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। ठंडे मौसम के बावजूद मेले में उत्साह और रौनक देखते ही बनती है ।

इस वर्ष के मेले की मुख्य थीम “भारतीय सैन्य इतिहास: साहस और बुद्धिमत्ता @75” (Indian Military History: Valour and Wisdom @75) थी। यह थीम भारतीय सशस्त्र बलों — सेना, नौसेना और वायुसेना — की स्वतंत्रता के बाद की वीरता, बलिदान और राष्ट्र-निर्माण में उनकी भूमिका को सम्मानित करती है।यहाँ थीम पवेलियन में प्रतिदिन ते समय पर विशिष्ट अतिथि का साक्षात्कार में देखा सुना जा सकता है। बैठने की अच्छी व्यवस्था है। 

 मेले में इसके अंतर्गत थीम पवेलियन, विशेष प्रदर्शनियाँ, किताबें और सत्र आयोजित किए जा रहे हैं  जो इतिहास, वीरता और राष्ट्रीय गौरव को दर्शाते हैं।  

 इस प्रतिष्ठित पुस्तक मेले का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Shri Dharmendra Pradhan) ने किया। इस अवसर पर मेहमान देशों में कतर को ‘Guest of Honour’ (मुख्य अतिथि देश) के रूप में आमंत्रित किया गया है , जबकि स्पेन को इस मेले का फोकस देश घोषित किया गया।
 

इस पुस्तक मेले में हिंदी, अंग्रेज़ी सहित अनेक भारतीय भाषाओं की पुस्तकों के साथ-साथ विदेशी भाषाओं की किताबें भी उपलब्ध हैं । साहित्य, विज्ञान, इतिहास, बाल साहित्य, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, तकनीक और आत्म-विकास जैसे विविध विषयों पर पुस्तकों की भरमार थी। छात्रों और युवाओं के लिए यह मेला विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हो सकेगा ऐसी आशा है । 

मेले का एक प्रमुख आकर्षण लेखक संवाद और पुस्तक विमोचन कार्यक्रम रहे, जहाँ प्रसिद्ध लेखकों ने अपने विचार साझा किए और पाठकों से सीधे संवाद किया। बच्चों के लिए कहानी सत्र, चित्रकला प्रतियोगिताएँ और रचनात्मक कार्यशालाएँ भी आयोजित की गईं, जिससे उनमें पढ़ने की रुचि बढ़ी।

शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हो रहे हैं। 

मेले में प्रवेश बिल्कुल मुफ़्त है। कोई टिकट नहीं है। खाने पीने हेतु साफ सुथरे stalls लगे हैं। 

फ्री  शटल सेवा द्वार से पवेलीयन तक की मिल रही है। 

हॉल संख्या 11 में 'नक्षत्र 'भी ज़रूर जाएँ यहाँ आरोग्य ' हेतु देसी दवा आदि के स्टाल हैं साथ ही ज्योतिष आदि विज्ञान संबंधित stalls देखे जा सकते हैं। 

बहुत ही सामान्य फीस पर प्रसिद्ध आचार्यों से आप भविष्य संबंधित परामर्श ले सकते हैं।  

जनवरी 2026 का दिल्ली पुस्तक मेला केवल पुस्तकों की खरीद-बिक्री का स्थान नहीं , बल्कि यह ज्ञान, संस्कृति और विचारों के आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच बना। इसने यह सिद्ध किया कि डिजिटल युग में भी पुस्तकों का महत्व और आकर्षण आज भी कायम है।

 

तस्वीरें ..  


















April 11, 2023

'अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा'

 


‘महापंडित’,हिंदी यात्रा सहित्य के पितामह' राहुल सांकृत्यायन' उर्फ 'केदारनाथ पाण्डेय'(9 अप्रैल 1893 – 14 अप्रैल 1963) कृत 'घुमक्कड़ शास्त्र 'पुस्तक में एक निबंध 'अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा' शीर्षक से है,में से कुछ पंक्तियाँ /लेखक के विचार उनके जन्म दिवस 9 April के अवसर पर -:
**संसार में यदि कोई अनादि सनातन धर्म है,तो वह घुमक्कड़ धर्म है। धर्म भी छोटी बात है,उसे घुमक्कड़ के साथ लगाना “महिमा घटो समुद्र की,रावण बसा पड़ोस” वाली बात होगी।
**घुमक्कड़ी के लिए चिंताहीन होना आवश्यक है,और चिंताहीन होने के लिए घुमक्कड़ी भी आवश्यक है। दोनों का अन्योनाश्रय होना दूषण नहीं भूषण है।'
**यदि कोई तरुण-तरुणी घुमक्कड़ धर्म की दीक्षा लेता है - यह मैं अवश्य कहूँगा, कि यह दीक्षा वही ले सकता है, जिसमें बहुत भारी मात्रा में हर तरह का साहस है - तो उसे किसी की बात नहीं सुननी चाहिए, न माता के आँसू बहने की परवाह करनी चाहिए, न पिता के भय और उदास होने की, न भूल से विवाह लाई अपनी पत्नीन के रोने-धोने की फिक्र करनी चाहिए और न किसी तरुणी को अभागे पति के कलपने की। बस शंकराचार्य के शब्दों में यही समझना चाहिए - निस्त्रैगुण्ये पथि विचरतः को विधिः को निषेधः।।
.. अर्थात 'विचरने वाले महापुरुष के लिये क्या विधि और क्या निषेध है ? 'और मेरे गुरु कपोतराज के बचन को अपना पथप्रदर्शक बनाना चाहिए -
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ ?
**कोई-कोई महिलाएँ पूछती हैं- क्या स्त्रियाँ भी घुमक्कड़ी कर सकती हैं.. स्त्रियाँ इसमें उतना ही अधिकार रखती हैं, जितना पुरुष। यदि वह जन्म सफल करके व्यक्ति और समाज के लिए कुछ करना चाहती हैं, तो उन्हें भी दोनों हाथों इस धर्म को स्वीकार करना चाहिए। घुमक्कड़ी-धर्म छुड़ाने के लिए ही पुरुष ने बहुत से बंधन नारी के रास्ते में लगाये हैं।
( ***घुमक्कड़ी का अर्थ -पर्यटन,यायावरी या देशाटन है )
लेख में दिया शेर 'ख़्वाजा मीर दर्द' का लिखा है ।